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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। एम्स ने एक साल
की बच्ची के किडनी कैंसर (विल्म्स ट्यूमर) की सफल सर्जरी की है। देवरिया की रहने
वाली यह बच्ची कैंसर से पीड़ित थी। एम्स में पहली बार इतनी कम उम्र की मरीज की
इतनी जटिल सर्जरी गुरुवार को की गई। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत स्थिर है और वह
तेजी से ठीक हो रही है। एम्स की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।
यह सर्जरी पीडियाट्रिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. श्रेयस कुमार के नेतृत्व में की गई। इसमें एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक मेडिसिन, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, तथा मेडिकल एवं रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागों का संयुक्त प्रयास शामिल था। इलाज में जांच और चार चरणों की कीमोथेरेपी के बाद यह जटिल ऑपरेशन किया गया। डॉ. श्रेयस ने बताया कि तकनीकी रूप से यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि ट्यूमर आंत, तिल्ली, अग्न्याशय और यकृत जैसे महत्वपूर्ण अंगों के समीप था।
यह
महाधमनी (एओर्टा) और प्रमुख रक्त वाहिकाओं से भी चिपका हुआ था। डॉ. श्रेयस के
अनुसार, ऐसी स्थिति में सर्जरी के
दौरान अत्यधिक सावधानी, सूक्ष्म तकनीक
और उच्च स्तरीय समन्वय की आवश्यकता थी। टीम ने इन सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक
सामना किया। ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर रही और हाई ब्लड प्रेशर सहित
अन्य संभावित जटिलताओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया गया। निगरानी के बाद उसे
अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, और आगे की
कीमोथेरेपी जारी रहेगी।
एम्स गोरखपुर
के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. श्रेयस ने विल्म्स ट्यूमर के बारे में बताया कि यह
बच्चों में होने वाला किडनी का एक प्रमुख कैंसर है। यह आमतौर पर कम उम्र में पाया
जाता है और बाल्यावस्था के कैंसरों का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा
होता है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह फेफड़ों, यकृत और अन्य अंगों में फैल सकता है। ऐसे मामलों में सर्जरी, कीमोथेरेपी और समन्वित कैंसर प्रबंधन अनिवार्य होता है।
उन्होंने बताया कि पूर्वांचल क्षेत्र में अधिकांश जटिल बाल कैंसर मामलों को पहले
उन्नत इलाज के लिए बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था। अब एम्स गोरखपुर में इस तरह
के मरीजों का इलाज शुरू होने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि सर्जरी करने वाली पूरी टीम इस उपलब्धि के लिए बधाई की पात्र है। एम्स के डॉक्टर प्रशासनिक सहयोग से ऐसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं को व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अपील है कि यदि बच्चों में पेट में गांठ, असामान्य सूजन या किसी भी सॉलिड ट्यूमर के लक्षण दिखाई दें तो इलाज में देरी न करें।