Default left Ad
Default right Ad
gorakhpur, cm yogi, cold day, CBI, Railway, case 31-Jan-2026 02:24 PM

रेलवे में फर्जी नियुक्तियों की जांच अब CBI को, केस दर्ज, आरोपियों से जल्द होगी पूछताछ

रूरल न्यूज नेटवर्क। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) में रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए फर्जी नियुक्ति करने के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। CBI ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इससे जुड़े आरोपियों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। भर्ती बोर्ड में तैनात दो कर्मचारियों ने कूटरचना कर अपने पुत्रों को पैनल में शामिल कर लिया था और उनकी नियुक्ति करा दी थी। इस मामले में तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष के मिलीभगत की जांच भी हो रही है।

रेलवे की सेंट्रल विजिलेंस की टीम ने इस मामले की गहनता से जांच की है। दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। पुलिस इस मामले में गैंगस्टर की कार्रवाई भी कर चुकी है। अब CBI यह देखेगी कि कहीं और अधिक गड़बड़ी तो नहीं की गई थी। पुराने मामलों को भी इससे जोड़कर देखा जाएगा। माना जा रहा है कि केस CBI के हाथ में जाने के बाद कुछ और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

Image Source Here...

क्या है मामला

रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर में तैनात रहे चंद्रशेखर आर्य और रामसजीवन ने 26 अप्रैल 2024 को जारी पैनल में अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया था। दरअसल जो पैनल बना था, उसमें शामिल दो अभ्यर्थियों ने यहां आने से इनकार कर दिया था। उनकी कहीं और नौकरी लग गई थी। उन्हें डाक्यूमेंट वेरीफिकेशन के लिए बुलाते समय यह जानकारी कर्मचारियों को हो गई थी। इसका फायदा उठाते हुए दोनों ने चालाकी से उसकी रोलनंबर के आगे अपने बेटों का नाम दर्ज कर लिया और पैनल को अप्रूव कराकर ज्वाइनिंग के लिए भेज दिया। उनके पुत्रों ने न तो फार्म भरा था, न परीक्षा ही और न ही उनका मेडिकल कराया गया लेकिन माडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में उन्हें नौकरी मिल गई। यह पैनल तत्कालीन चेयरमैन के हस्ताक्षर से जारी हुआ था। चंद्रशेखर आर्य ने अपने बेटे राहुल प्रताप व निजी सचिव रामसजीवन ने अपने बेटे सौरभ कुमार को नौकरी दी थी।

निलंबित हो चुके हैं तत्कालीन चेयरमैन

आपसी तालमेल गड़बड़ होने के बाद तत्कालीन चेयरमैन ने यह गड़बड़ी पकड़ने का दावा किया था। आनन-फानन में रेल कोच फैक्ट्री रायबरेली को पत्र लिखकर गड़बड़ी की जानकारी दी गई, जिसके बाद दोनों कर्मचारियों को निकाल दिया गया। हालांकि जांच में चेयरमैन को भी जिम्मेदार मानते हुए निलंबित कर दिया गया। दोनों रेल कर्मियों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई।

पहले से चल रही थी जांच

रेलवे भर्ती बोर्ड में यह गड़बड़ी तब हुई, जब पहले से ही एक मामले में विजिलेंस की जांच चल रही थी। पूर्वोत्तर रेलवे मे वर्ष 2018-19 में सहायक लोको पायलटों की भर्ती में भी गड़बड़ी का मामला सामने आया था। बोर्ड ने स्वीकृत पदों से दोगुनी भर्ती निकाल दी थी। परीक्षा के बाद 1681 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई तो खेल उजागर हुआ। तत्कालीन चेयरमैन ने लिखित परीक्षा के बाद कर्मचारियों के सहयोग से पैनल बनाने, जारी करने, अभिलेखों की जांच में हेराफेरी व मेडिकल में गड़बड़ी शुरू कर दी। मनमाने ढग से पैनल बने और नियुक्ति दी गई। यह मामला खुलने के बाद तत्कालीन चेयरमैन को हटा दिया गया।

Static Fallback middleAd2 Ad

अपने ज़िले और उसके गांवों की खबरें जानने के, लिए जुड़े हमसे अभी

×