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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
गोरखपुर एम्स के
स्त्री एवं प्रसूति
रोग विभाग ने
सर्वाइकल कैंसर के
प्रति जागरूकता अभियान
शुरू किया है।
इस अभियान के
तहत महिलाओं को
सर्वाइकल कैंसर के
लक्षणों और हर तीन साल
पर पैप जांच
कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विभाग द्वारा महिलाओं
को पैप जांच
की प्रक्रिया भी
समझाई जा रही है। बताया
गया कि यह एक दर्दरहित
प्रक्रिया है, जिसके
परिणाम जल्द मिल
जाते हैं। यदि
जांच में सर्वाइकल
कैंसर की पुष्टि
होती है, तो तत्काल उपचार
शुरू किया जाता
है।
स्त्री एवं प्रसूति
रोग विभाग की
अध्यक्ष डॉ. शिखा
सेठ ने बताया
कि जनवरी माह
को विश्वभर में
सर्वाइकल कैंसर जागरूकता
माह के रूप में मनाया
जाता है। उन्होंने
कहा कि महिलाओं
को सही जानकारी
देना अत्यंत महत्वपूर्ण
है, क्योंकि कई
महिलाएं शर्म के कारण अपनी
समस्या नहीं बतातीं,
जिससे रोग बढ़ने
पर उपचार मुश्किल
हो जाता है।
एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आराधना
सिंह ने जानकारी
दी कि भारत में सर्वाइकल
कैंसर महिलाओं में
होने वाले सबसे
आम कैंसरों में
से एक है। उन्होंने इस आम धारणा को
गलत बताया कि
यह केवल शादीशुदा
या अधिक उम्र
की महिलाओं को
होता है। डॉ. सिंह के
अनुसार, सर्वाइकल कैंसर
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस
(एचपीवी) के कारण
होता है, जो यौन संपर्क
से फैलता है।
इसलिए यौन संपर्क
में आई किसी भी महिला
को इसका खतरा
हो सकता है,
चाहे वह शादीशुदा
हो या नहीं।
डॉ. आराधना सिंह
ने सलाह दी कि 25 वर्ष
या इससे अधिक
उम्र की महिलाओं
को नियमित रूप
से पैप जांच
करानी चाहिए। यह
जांच रोग के शुरुआती बदलावों का
पता लगा लेती
है, जिससे उपचार
पूरी तरह सफल और आसान
हो जाता है।
गोरखपुर एम्स की
कार्यकारी निदेशक डॉ.
विभा दत्ता ने
बताया कि देश में हर
आठ मिनट में
एक महिला की
मृत्यु सर्वाइकल कैंसर
के कारण होती
है। समस्या यह
है कि शुरुआती
अवस्था में इसके
लक्षण बहुत हल्के
या बिल्कुल नहीं
होते इसलिए समय
पर जांच न होने से
इसका पता देर से चलता
है। आंकड़े बताते
हैं कि हर 53
महिलाओं में से एक महिला
को जीवन में
कभी न कभी सर्वाइकल कैंसर होने
का खतरा रहता
है। सभी का जागरूक होना
जरूरी है। पुरुषों
को भी महिलाओं
के स्वास्थ्य के
लिए जांच को प्रेरित करना चाहिए।