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Monday, 15th June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। नगर निगम का सदन मंगलवार को शुरू होने से पहले
ही विवादों में घिर गया। बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित थी, लेकिन करीब आधे घंटे की देरी से शुरू हुई। अधिकारियों के देर से सदन हाल पहुंचने पर पार्षदों ने
नाराजगी जताई और इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। सदन में मौजूद पार्षद करीब आधे घंटे तक अधिकारियों का
इंतजार करते रहे। जैसे ही अधिकारी पहुंचे, पार्षदों ने एक साथ
विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब सभी पार्षद समय से सदन में पहुंच सकते हैं, तो अधिकारियों को भी समय का पालन करना चाहिए। पार्षदों ने कहा कि बार-बार इस तरह की लापरवाही से सदन की
गरिमा प्रभावित होती है और जनप्रतिनिधियों का सम्मान कम होता है।
“अपमान के बल पर सदन
नहीं चलेगा”
विरोध के दौरान पार्षद रवींद्र सिंह ने कड़े शब्दों में
नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि “अपमान के बल पर सदन नहीं चलेगा।” उन्होंने चेतावनी
दी कि यदि अधिकारियों का यही रवैया रहा तो आगे सदन की कार्यवाही चलाना मुश्किल हो
जाएगा।
“सम्भव” कार्यक्रम को लेकर भी उठे सवाल
सदन में सबसे बड़ा मुद्दा “सम्भव” कार्यक्रम को लेकर उठा।
हर मंगलवार को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम उसी समय नीचे सभागार में चल रहा था, जबकि ऊपर सदन की बैठक बुलाई गई थी।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि एक ही समय पर दो महत्वपूर्ण
कार्यक्रम रखे जाने से अधिकारी “सम्भव” कार्यक्रम में व्यस्त रहे और सदन में देरी
से पहुंचे। पार्षदों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि जब सदन की बैठक
पहले से तय थी, तो अधिकारियों की मौजूदगी सदन में सुनिश्चित की
जानी चाहिए थी।
पूर्व नगर आयुक्त के विदाई समारोह पर नाराजगी
सदन में पूर्व नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के विदाई
समारोह का मुद्दा भी उठा। कई पार्षदों ने कहा कि उन्हें समारोह की सूचना ही नहीं
दी गई, जिसके कारण करीब आधे से ज्यादा पार्षद
कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
पार्षदों ने इसे भी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी बताते हुए
नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की
कमी साफ दिखाई दे रही है।
रोजा खातून के निधन के बाद मिनट्स जारी न होने पर सवाल
पूर्व पार्षद रोजा खातून के निधन के बाद सदन के मिनट्स जारी
न किए जाने का मामला भी जोर-शोर से उठा। पार्षदों ने इसे असंवेदनशीलता बताते हुए
कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के निधन के बाद यह एक जरूरी औपचारिकता होती है, जिसे नजरअंदाज किया गया।
अपर नगर आयुक्त ने मानी गलती
लगातार बढ़ते विरोध के बीच अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने
स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने नगर निगम की ओर से हुई चूक स्वीकार करते हुए
सदन में खेद जताया। साथ ही भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा नहीं
होंगी।
हंगामे के बीच सदन स्थगित
हालांकि पार्षदों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ। माहौल इतना गरमा गया कि आगे की कार्यवाही जारी रखना मुश्किल हो गया। इसके बाद पूर्व पार्षद रोजा खातून की आत्मा की शांति के लिए सदन में दो मिनट का मौन रखा गया। मौन के बाद बैठक को स्थगित कर दिया गया। इस तरह कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने से पहले ही नगर निगम सदन की कार्यवाही समाप्त हो गई।