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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। दीनदयाल
उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 22
फरवरी को
रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड सेरेमनी का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत बेहतरीन
प्रदर्शन करने वाले रिसर्चर को अवॉर्ड दिया जाएगा।
इसके लिए
प्लेटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और
ब्रॉन्ज कैटेगरी तय की जा जाएगी। शोधार्थियों का सिलेक्शन प्रतिष्ठित जर्नल्स में
पब्लिकेशन, पेटेंट, पब्लिश्ड बुक और प्रोजेक्ट्स के आधार पर होगा।
इस अवॉर्ड का
उद्देश्य उन प्रोफेसर्स और रिसर्च स्कॉलर को पहचानना और सम्मानित करना है जो
प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन करते हैं, जो स्कोपस या वेब ऑफ साइंस में लिस्टेड हैं और क्वारटाइल
रैंकिंग (Q1-Q4) के अनुसार वर्गीकृत हैं।
क्वारटाइल
रैंकिंग से तय होगी कैटेगरी यह पुरस्कार
मुख्य रूप से शोधार्थियों द्वारा विभिन्न जर्नल्स में किए गए प्रकाशनों के
मूल्यांकन पर केंद्रित है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य शिक्षकों और शोध विद्वानों
को पहचानना और पुरस्कृत करना है, जो प्रतिष्ठित
अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन करते हैं, जो स्कोपस या
वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध हैं और क्वारटाइल रैंकिंग (Q1-Q4) के अनुसार वर्गीकृत हैं।
इन पुरस्कारों
का उद्देश्य उच्च प्रभाव वाले अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन को प्रोत्साहित
करना और गोरखपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शोध अभिवृति को बढ़ाना
है।
पांच कैटेगरी
में दिया जाएगा अवॉर्ड ये पुरस्कार
प्लेटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और
ब्रॉन्ज श्रेणियों में विभाजित किए गए हैं, जो जर्नल की
रैंकिंग के आधार पर विभिन्न स्तरों की सफलता को दर्शाते हैं।
अवॉर्ड कैटेगरी और नकद राशि
* प्लेटिनम पुरस्कार (Q1 जर्नल्स - शीर्ष 25%) नकद राशि: ₹ 11,000/- प्रति प्रकाशन * डायमंड
पुरस्कार (Q2 जर्नल्स - अगले 25%) नकद राशि: ₹
7,000/- प्रति प्रकाशन *
गोल्ड पुरस्कार
(Q3 जर्नल्स - अगले 25%) नकद राशि: ₹
5,000/- प्रति प्रकाशन * सिल्वर पुरस्कार (Q4 जर्नल्स -
निचले 25%) नकद राशि: ₹ 3,000/- प्रति प्रकाशन * ब्रॉन्ज
पुरस्कार (Q1-Q4 जर्नल्स)
केवल प्रशंसा
पत्र/योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जो किसी भी Q1-Q4 जर्नल्स में सह-लेखित अनुसंधान योगदान को
स्वीकार करता है। यह पुरस्कार केवल प्रथम या संबंधित लेखक, जिनकी संबद्धता दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से है उनको ही दिया जाएगा।
क्या है 'रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड संकाय सदस्यों की शोध
गतिविधियों के व्यापक विश्लेषण के
आधार पर, जिसमें Q1/Q2/Q3/Q4 जर्नल्स में प्रकाशन, पेटेंट (प्रकाशित या स्वीकृत), प्रकाशित पुस्तकें और परियोजनाएं (स्वीकृत और जारी) शामिल
हैं, "उत्कृष्ट शोधकर्ता
पुरस्कार" दिया जाएगा। इसमें ₹
21,000/- की नकद राशि और
एक विशेष मान्यता प्रमाण पत्र शामिल होगा।
114 रिसर्चर को मिलेगा अवॉर्ड शोध और विकास प्रकोष्ठ ने इन पुरस्कारों के लिए
प्रविष्टियां आमंत्रित की थी। जिनमें 1
जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक के शोध प्रकाशनों और उपलब्धियों को शामिल किया गया है।
इन
प्रविष्टियों की विशेषज्ञ समिति द्वारा जांच की जा चुकी है। 22 फरवरी को दोपहर 3 बजे
विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया
गया हैम, जिसमें इस बार कुल 114 शोधकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
पिछले वर्ष से शुरू किया गया यह अवॉर्ड इस अवॉर्ड की शुरुआत पिछले वर्ष विश्वविद्यालय
के हीरक जयंती के अवसर पर किया गया था। इसमें भौतिकी विभाग के 18, गणित और सांख्यिकी के 6, जैवप्रौद्योगिकी
के 9, रसायन विज्ञान के 7, वनस्पति विज्ञान के 14, प्राणि विज्ञान
के 4 समेत इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक सूक्ष्मजैविकी, वाणिज्य, मनोविज्ञान के कुल 66 शोधकर्ताओं को
पुरस्कृत किया गया था।
टॉप 5 शोधकर्ताओं में क्रमशः भौतिकी विभाग के डॉ. अम्बरीश कुमार
श्रीवास्तव, गणित एवं सांख्यिकी विभाग
के डॉ. राजेश कुमार, जैवप्रौद्योगिकी
विभाग के प्रो. राजर्षि गौर एवं प्रो. दिनेश यादव तथा प्राणि विज्ञान विभाग के डॉ.
महेन्द्र प्रताप सिंह शामिल थे।
इन में
सर्वाधिक पुरस्कार भौतिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने हासिल किए थे। वहीं भौतिकी विभाग
के ही डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव को "उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार"
दिया गया था जिसमें ₹ 21,000/- की नकद राशि और
एक विशेष मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। वहीं दूसरे एवं तीसरे स्थान पर
जैवप्रौद्योगिकी के क्रमशः प्रो दिनेश यादव एवं प्रो. राजर्षि गौर रहे थे।
कुलपति प्रो.
पूनम टंडन का संदेश कुलपति प्रो.
पूनम टंडन ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उनके शोधकर्ताओं, जिनमें शिक्षक एवं छात्र दोनों शामिल हैं, से होती है। हमारी इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने हैं।
हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इस पहल से विश्वविद्यालय के शोध वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होगा। आने वाले समय में विश्वविद्यालय की वैश्विक छवि एवं रैंकिंग में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी होगी।