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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में शुक्रवार
शाम नौका विहार
इलाके में हर रोज की
तरह सामान्य नहीं
थी। शाम ढलते
ही पूरे इलाके
की बिजली गुल
हो गई। इससे
पहले कि लोग कुछ समझ
पाते, नागरिक सुरक्षा
के सायरन ने
माहौल को गंभीर
बना दिया।
चारों ओर अलर्ट
की आवाज गूंजने
लगी और वार्डेन
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
के जरिए लोगों
को निर्देश देने
लगे कि घर में रोशनी
न जलाएं… खिड़कियां
बंद रखें… बाहर
न निकलें…।
कुछ ही मिनटों
में रामगढ़ताल इलाके
के ऊपर से लड़ाकू विमानों
की गरज सुनाई
देने लगी। अचानक
लड़ाकू विमानों से
बम गिराए जाने
लगे। चारो तरफ
अफरातफरी मच गई।
लड़ाकू विमानों ने बरसाए बम
अचानक हुई इस
हलचल ने लोगों
को किसी बड़े
हमले की आशंका
से भयभीत कर
दिया। लोग बंकरों
में छिपने लगे।
नागरिक सुरक्षा, फायर
ब्रिगेड और पुलिस
की टीम सर्किट
हाउस, महंत दिग्विजयनाथ
पार्क और एनेक्सी
भवन की ओर दौड़ पड़ी।
वहां "हमले" के बाद आग लगने
और "घायलों" के होने की सूचना
थी।
हालांकि, यह सब
एक योजनाबद्ध मॉकड्रिल
का हिस्सा था।
नेताजी सुभाष चंद्र
बोस की जयंती
पर ब्लैकआउट मॉक
ड्रिल का आयोजन
किया गया। यह अभ्यास गोरखपुर
आपदा विभाग और
जिला प्रशासन द्वारा
संयुक्त रूप से महंत दिग्विजयनाथ
पार्क में किया
गया।
क्या था मॉकड्रिल का
उद्देश्य?
यह मॉकड्रिल, जिसे ब्लैकआउट अभ्यास कहा जाता है, का उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में नागरिक सुरक्षा और अन्य विभागों की तत्परता को परखना था। साथ ही आम नागरिकों को युद्ध के समय बचाव के तरीकों के लिए भी जागरूक करना था। मॉकड्रिल के दौरान बिजली बंद कर दी जाती है, ताकि हवाई हमले करने वाले लड़ाकू विमानों को आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान में कठिनाई हो।