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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। महायोगी गुरु
गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न
पदों पर साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, शरीर रचना के सहयोगी प्राध्यापक पद के लिए साक्षात्कार
संपन्न हुआ, जिसमें देश के कई प्रमुख
आयुर्वेदाचार्य शामिल हुए।
साक्षात्कार
प्रक्रिया में मुंबई के प्रख्यात आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. दीप नारायण शुक्ल, लखनऊ आयुर्वेद कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर इंद्रेश कुमार
सिंह और जयपुर, राजस्थान के राष्ट्रीय
आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर सुनील कुमार जायसवाल आयुष विश्वविद्यालय पहुंचे।
साक्षात्कार पूर्ण होने के बाद टीम के सदस्यों ने विश्वविद्यालय का निरीक्षण भी
किया।
डॉ. दीप नारायण
शुक्ल ने इस अवसर पर कहा कि गोरखपुर का आयुष विश्वविद्यालय भविष्य में दक्षिण भारत
के चिकित्सा संस्थानों को कड़ी टक्कर देने में सक्षम होगा। उन्होंने यह भी बताया
कि जल्द ही रोगियों की सेवा के लिए विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी।
फार्मेसी का
निरीक्षण करने के बाद टीम के सदस्यों ने कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय
आयुर्वेद औषधियों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। वर्तमान में यहां आधा
दर्जन से अधिक बहुउपयोगी चूर्ण के रूप में औषधियां तैयार की जा रही हैं। भविष्य
में टैबलेट फॉर्म में भी औषधियां बनाई जाएंगी, साथ ही आंवला
जूस और आयुर्वेदिक तेल का निर्माण भी शुरू होगा।
टीम के सदस्यों
ने सीमित संसाधनों और स्टाफ के बावजूद विश्वविद्यालय को आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी जैसी कई चिकित्सा पद्धतियों का केंद्र
बनाने के लिए कुलपति, चिकित्सकों और
कर्मचारियों की सराहना की।
प्रोफेसर इंद्रेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी संस्थान के सर्वांगीण विकास के दो मुख्य पहलू होते हैं: उसकी भव्यता और दिव्यता। विश्वविद्यालय के भवन एक ओर अपनी भव्यता प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यहां मिल रही आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों की सेवाएं इसकी दिव्यता को प्रदर्शित कर रही हैं। इस दौरान डॉ. लक्ष्मी अग्निहोत्री, शिवांग पति त्रिपाठी, आशुतोष राय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे