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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। किसी को रोटी देने से कहीं बेहतर है कि रोजी दी जाए तो वह व्यक्ति आजीवन स्वयं पर निर्भर बन जाएगा। इसी प्रकार समाज को उच्च श्रेणी में बनाने के लिए शिक्षा का होना नितांत अनिवार्य है। कुछ ऐसी ही सोच के धनी हैं दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव।
इन्होंने शिक्षा के मंदिर की स्थापना कर बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने का बीड़ा वर्ष 2005 में उठाया। शुरूआत में तो कुछ नाममात्र बच्चों ने यहां दाखिला लेकर शिक्षा अर्जित करना प्रारंभ किया। दुर्गेश की मेहनत एक वर्ष बाद रंग लाई और अभिभावकों ने यहां दी जाने वाली शिक्षा को खूब सराहा। धीरे-धीरे ख्याति इस कदर फैलती गई कि बच्चों की संख्या 250 तक पहुंच गई। इस उपलब्धि के कारण मानों दुर्गेश के हौसलों को पंख मिल गए हों। दुर्गेश की मेहनत को देखते हुए इनकी पत्नी संध्या रानी ने भी इनके मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर चलना प्रारंभ कर दिया। स्कूल परिसर में फुलवारी, बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्थाओं के बीच नौनिहालों को शिक्षा की कड़ी से जोड़ने का क्रम आज भी अनवरत जारी है।
धीरे-धीरे जेपी एजुकेशन एकेडमी को प्लेवे से कक्षा 5 तक की मान्यता मिली उसके बाद जूनियर की मान्यता और अब हाईस्कूल व इंटरमीडिएट तक के बच्चों को एक ही स्थान पर शिक्षा की सुविधा प्रदान हो रही है। दुर्गेश ने अपने सुपुत्र सलिल कुमार श्रीवास्तव की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिक्षा की इस बगिया को महकाने का दायित्व सौंप दिया है।
विदित हो
कि सलिल की प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर
से हुई एवं इनकी आगे
की पढ़ाई कानपुर,
आगरा, मेरठ से संपन्न हुई।
बदलते दौर के तरीकों में
पारंगत सलिल अपने
हाईटेक तरीकों से
नौनिहालों को उच्च
कैरियर रूपी शिक्षा
में करीब 1000 बच्चों
को पारंगत करा
रहे हैं।
वर्ष 2019 से फरेंदा
में भी महक रही शिक्षा
की बगिया
रूरल न्यूज नेटवर्क के संवाददाता से हुई विशेष बातचीत में सलिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2019 में आनंदनगर फरेंदा में भी जेपी एजुकेशन एकेडमी की दूसरी ब्रांच का शुभारंभ किया गया। आज 450 से अधिक बच्चे यहां शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल हैं।
हमारा उद्देश्य किताबी शिक्षा के अलावा स्पोर्टस, कल्चरल एक्टिीविटी, सामान्य ज्ञान, व्यावहारिक ज्ञान के साथ ही अनुशासित बनाना भी है। क्योंकि शिक्षा के अलावा व्यवहारिक ज्ञान व अनुशासन कैरियर की प्रथम पायदान होती है। कुछ गरीब घरों के बच्चों को भी उनके आर्थिक पहलू को देखकर विशेष सहयोग प्रदान किया जाता है। पैसों के अभाव में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यही हमारी कोशिश रहती है।
यह मिल चुके
अवार्ड
जेपी एजुकेशन अकादमी को
अब तक दर्जनों
अवार्ड से सम्मानित
किया जा चुका है। अचीवर्स
अवार्ड, एजुकेशन एक्सीलेंस
अवार्ड, इकोनामी अवार्ड,
गेम्स ऑफ़ पूर्वांचल,
द्रोणाचार्य अवार्ड के
अलावा शिक्षा मंत्री
द्वारा इस स्कूल
को सम्मानित किया
जा चुका है।