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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
गोरखपुर में पुरुषोत्तम
सत्संग मंडल की ओर से
आयोजित श्रीमद् भागवत
कथा के चौथे दिन की
कथा को आगे बढ़ाते हुए
वाचक आचार्य ने
भक्तों को बताया
कि जीवन के किसी भी
तहर के कष्ट आ जाए
भगवान की भक्ति
कभी नहीं छोड़नी
चाहिए।
कथा में श्रीकृष्ण
जन्मलीला प्रसंग का
वर्णन हुआ। इस दौरान जैसे
ही श्रीकृष्ण के
जन्म होने की बात कथावाचक
ने कही और नंद के
आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जयकारे गूंजने
लगे। लॉन में ज्यादा संख्या
में भक्त मौजूद
रहे। भजन और लीला से
हर तरफ भक्तिमय
माहौल बना रहा।
भगवान धर्म और धरती
की रक्षा के लिए
अवतरित होते
व्यास पीठ से
कथामृत पान करते
हुए कहा कि भक्ति ज्ञान
वैराग्य को बढ़ाकर
जो परम तत्व
की प्राप्ति कारण
वही भागवत है।
उन्होंने कहा कि
जब पृथ्वी लोक
पर पाप बढ़ जाते हैं,
तब भगवान धर्म
और धरती की रक्षा के
लिए अवतरित होते
हैं।
भगवान श्री कृष्ण
की भक्ति से
मनुष्य भवसागर पार
हो जाता है लेकिन भक्ति
में समर्पण का
भाव होना चाहिए
जो भगवान से
मांग करता है,
उसमें स्वार्थ का
भाव होता है,
इसलिए सत्य प्रेमी
बनकर ईश्वर के
पास जाओ तो उम्मीद से
ज्यादा ईश्वर देता
है।
हर परिस्थिति में प्रभु को
करें याद
उन्होंने भक्तो को
समझाते हुए कहा कि जीवन
में कैसा भी दुख और
कष्ट आए आप भक्ति मत
छोड़िए, क्या कष्ट
आने पर आप भोजन छोड़
देते हैं, नहीं
क्योंकि भोजन छोड़
देंगे तो जिंदा
नहीं रहेंगे। इस
प्रकार सत्संग छोड़
देंगे तो कहीं के नहीं
रहेंगे। इसलिए प्रत्येक
परिस्थिति में प्रभु
को याद कीजिए।
गजेंद्र मोक्ष की
कथा भी हमें यही शिक्षा
प्रदान देता है।
उसके बाद उन्होंने
समुद्र मंथन की कथा शुरू
की और बताया
कि समुद्र से
जब अमृत निकला
तो उसे पीने
के लिए दैत्य
और देव में झगड़ा शुरू
हो गया। अंततः
अमृत देवता पी
गए लेकिन जब
जहर निकला तो
उसे लेने कोई
आगे नहीं आया।
आखिर में शिव जी को
बुलाकर उन्होंने जहर
पीने का आग्रह
किया। शिवजी हंसते-हंसते उसे
जहर को पी गए। उससे
उनका कंठ नीला
हो गया और वे नीलकंठ
कहलाए।
भारतीय संस्कृति से जन्मदिन मनाने
पर जोर दिया
सुरक्षा आचार्य ने
कृष्ण जन्म के प्रसंग सुनाते
हुए कहा कि जन्मदिन भारतीय संस्कृति
से मनाने पर
जोर दिया। उन्होंने
कहा कि हमारी
संस्कृति में दीया
जलाने की परंपरा
है, बुझाने की
नहीं है।
बेटे के जन्मदिन
पर उसे मंदिर
ले जाओ, जो भी जन्मदिन
हो उस पर उतने दीपक
जलवाओ, भगवान की
आरती करवाओ, बड़े
बुजुर्गों के चरण
स्पर्श, संत विप्रो
को भोजन, दान-
पुण्य कर आशीर्वाद
दिलाओ। उसे अच्छे
संकल्प दिलाओ यही
नंद बाबा ने किया और
भागवत भी यही सिखाती है।
बधाई गीत पर झूमे भक्त
वहीं श्री
कृष्ण जन्म के प्रसंग के
दौरान जैसे ही व्यास जी
ने 'नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल
की' बधाई गीत
गाया, पांडाल में
जयकारे गुजरने लगे
गाजे- बाजे और शहनाइयां की धुन पर भक्त
नाचने लगे। पुष्प
बरसात, उपहार लूटते
हुए भगवान का
जन्म उत्सव धूमधाम
के साथ मनाया
गया।
प्रभु जन्म उत्सव
की खुशी में
ऐसा प्रतीत हो
रहा था जैसे पूरा गोकुल
नगरी गोरखपुर की
धरती पर आकर हषउल्लास मना रही है भक्तों
में हर्षो उल्लास
का वातावरण था
पूरे हाल में गुब्बारे से सजा हुआ था।
माखन मिश्री का
भोग लगाकर श्रद्धालु
आपस में खुशियां
मना रहे थे।
इस अवसर पर पुरुषोत्तम सत्संग मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार द्विवेदी, यजमान परिवार प्रहलाद दास, रेखा गुप्ता, ध्रुव, नारायण, सुरेश, प्रमोद कुमार द्विवेदी रमाशंकर शुक्ल, अशोक मिश्रा, अलका रानी, कस्तूरी देवी और भारी संख्या भक्तों की भीड़ महिलाएं और पुरुष की थी।