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• gorakhpur, cm yogi, celebration, Telangana Governor • गोरखपुर / चरगांवा • 19-03-2026

नौका विहार पर नूतन वर्ष अभिनंदन समारोह, तेलंगाना राज्यपाल रहे शामिल, स्कूली बच्चों ने किए सांस्कृतिक कार्यक्रम

रूरल न्यूज नेटवर्क। नौका विहार में भारतीय नूतन वर्षाभिनंदन समारोह आयोजन समिति द्वारा भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने भारत माता के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर की। इस अवसर पर शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. के.पी. कुशवाहा और प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल भी मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। संस्कार भारती के कलाकारों, लोकगायक राकेश श्रीवास्तव, सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग के बच्चों और अन्य प्रतिभागियों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।

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नववर्ष और भारतीय परंपरा पर जोर

अपने संबोधन में शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से भारतीय नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी दिन उगादि का पर्व आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय त्योहार प्रकृति के बदलाव से जुड़े होते हैं, जैसे एक ऋतु के जाने और दूसरी के आने का समय। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पंचांग के आधार पर ही जन्म कुंडली और महत्वपूर्ण कार्यों की गणना होती है। पुराने समय में युद्ध भी हिंदी तिथियों के अनुसार ही लड़े जाते थे।

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अयोध्या और राम मंदिर का उल्लेख

अपने भाषण में उन्होंने अयोध्या का जिक्र करते हुए कहा कि अब लोग गर्व के साथ वहां जा रहे हैं क्योंकि भगवान राम वहां विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोग राम मंदिर के दर्शन कर चुके हैं, जिससे अयोध्या एक प्रमुख आस्था और पर्यटन केंद्र बन गई है।

प्रकृति और नववर्ष का संदेश

उन्होंने कहा कि बसंत ऋतु में नई कोपलें आने लगती हैं, जो नए वर्ष और नई शुरुआत का संकेत देती हैं। प्रकृति हमें सिखाती है कि पुरानी चीजों को छोड़कर नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

भारतीय संस्कृति का महत्व

प्रांत प्रचारक रमेश ने कहा कि भारतीय पंचांग के अनुसार ही सभी त्योहार मनाए जाते हैं और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष की शुरुआत होती है। उन्होंने बताया कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया के कई देश संघर्ष और तनाव से गुजर रहे हैं, तब भारत की संस्कृति और परंपराएं शांति का मार्ग दिखाती हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मृति मल्ल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन मनीष जैन ने दिया। अंत में राष्ट्रगान और भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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