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Monday, 15th June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में 17 मार्च की सुबह 6:15 बजे प्रापर्टी
डीलर राजकुमार चौहान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस एक
नाबालिग समेत 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा चुकी है। 9 आरोपियों के
खिलाफ चिलुआताल थाने में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमे शामिल 2 आरोपियों को हत्या का दोषी
माना गया है। जबकि नाबालिग समेत 8 आरोपियों को साजिश रचने और
साक्ष्य छिपाने का आरोपी बनाया गया है।
पुलिस के मुताबिक, गैंग लीडर
लालजी उर्फ गट्टू यादव, राज चौहान उर्फ निरहू, विपिन यादव, दीपक गौड़, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव, मनीष यादव और
सचिन यादव की घटना में संलिप्तता मिली है। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर गैंगस्टर
एक्ट की कार्रवाई की गई है। इस संबंध में
एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि 9 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर
की कार्रवाई की गई है। अब आरोपियों की अवैध संपत्ति भी चिह्नित की जाएगी।
राजकुमार की पत्नी ने कराई
थी एफआईआर
राजकुमार की पत्नी सुशीला
देवी की तहरीर पर पुलिस ने दीपक गौड़, धर्मदेव चौहान, लालजी यादव उर्फ गट्टू, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी उर्फ टिल्लू, अभय पांडेय
समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
जांच के आधार पर हत्या में
राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव का नाम सामने आया,जिन्हें पुलिस ने कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। इसके
बाद साजिश और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दीपक गौड़, लालजी यादव, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव और मनीष यादव और सचिन यादव को गिरफ्तार किया
था।
आरोपी बने 6 को मिल सकता है क्लीन चिट
इस घटना की जांच गोरखनाथ
पुलिस कर रही है। जांच में बरगदवा के पार्षद धर्मदेव चौहान, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र
चौधरी और अभय पांडेय की संलिप्तता नहीं मिली है। पहले दिन राजकुमार की पत्नी ने
पार्षद समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। वहीं जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच
पड़ताल की तो पार्षद समेत 6 आरोपियों के
खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। इसलिए अभी तक इनपर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई है। ऐसा
माना जा रहा है कि बहुत जल्द पुलिस क्लीन चिट भी दे सकती है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद लालजी
यादव रिहा
राजकुमार चौहान की हत्या
में आरोपी बनाए गए लालजी यादव उर्फ गट्टू की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने अवैध घोषित
कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई में अहम
फैसला देते हुए लालजी यादव को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। यह गलती कैसे हुई है इसकी जांच का भी निर्देश दिया है।
रिहाई का आदेश पहुंचते ही जेल प्रशासन ने लालजी को तत्काल प्रभाव से रिहा कर दिया।
कानूनी
प्रक्रियाओं का नहीं किया पालन
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और
न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि
गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। विशेष
रूप से, गिरफ्तारी के कारणों की सूचना न तो आरोपी लालजी
यादव को दी गई और न ही उसके परिजनों को उपलब्ध कराई गई। कोर्ट ने कहा कि यह चूक
संविधान के अनुच्छेद 22(1) और स्थापित
न्यायिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही, 21 मार्च 2026 को गोरखपुर के रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड आदेश
को भी निरस्त कर दिया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि
गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि गिरफ्तारी के
कारणों की जानकारी आरोपी और उसके परिजनों को देना जरूरी है। लालजी यादव की ओर से
अधिवक्ता करुणेश प्रताप सिंह और अमित कुमार यादव ने पैरवी की थी।
जांच अधिकारी के खिलाफ भी
कार्रवाई का आदेश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि
याचिकाकर्ता को बिना किसी देरी के रिहा किया जाए और इसके लिए प्रमाणित प्रति का
इंतजार भी न किया जाए। कोर्ट का आदेश मिलते ही जेल प्रशासन ने लाल जी यादव को
तत्काल रिहा कर दिया। उधर, अदालत ने
रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में आदेश पारित करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है।
वहीं, रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति
जिला जज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को भेजी जाए, ताकि इस गलती पर जांच अधिकारी के खिलाफ कर्तव्य में
लापरवाही के आरोप में तीन दिन के भीतर कार्रवाई शुरू की जा सके।
गोरखनाथ पुलिस को ट्रांसफर
की गई है जांच
चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड केस गोरखनाथ पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है। इस केस की जांच गोरखनाथ थाने के इंस्पेक्टर की निगरानी में की जा रही है। पार्षद सहित अन्य आरोपियों को बचाने के पीड़िता के आरोप पर यह फैसला लिया गया।