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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। पक्कीबाग स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में 'संस्कृति बोध परियोजना' प्रोग्राम का आयोजन
किया गया। यह प्रोग्राम विद्या भारती की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत किया
गया।
जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्रीय
अभियान प्रमुख राजेंद्र देव त्रिपाठी पहुंचे। उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम
से युवाओं को भारतीय संस्कृति की गहरी जानकारी देना है, जिससे वे शुरू से ही इससे जुड़ें रहे।
भारतीय संस्कृति को सिर्फ जानना नहीं है। उसे
अपने व्यवहार से अपनाने की जरूरत है। प्रोग्राम में स्टूडेंट्स ने बढ़चढ़ कर हिस्सा
लिया। उन्होंने भी अपनी संस्कृति को गहराई से जानने के लिए उत्सुकता दिखाई।
व्यवहार में
संस्कृति का समावेश जरुरी
अपने संबोधन में राजेंद्र देव ने कहा कि
संस्कृति की उपयोगिता और महत्ता तभी सुरक्षित रह सकती है, जब जीवन के व्यवहार में उसके मूल्यों का सम्यक
समावेश हो।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संस्कृति की
अवधारणा सर्व-समावेशी है और यही कारण है कि यह मात्र प्रदर्शन की वस्तु न होकर
आचरण और व्यवहार में उतारने योग्य है।
विश्व बंधुत्व की
विरासत
उन्होंने आगे कहा कि भारतवर्ष प्राचीन काल से
ही विश्व बंधुत्व, आपसी प्रेम और आत्मीयता का आदर्श स्थापित करता
रहा है। 'सभी के प्रति समान भाव' भारतीय दर्शन और हमारी संस्कृति की अमूल्य
विरासत है।
भारतीय परंपरा यह मानती है कि एक ही आत्मा सभी
प्राणियों में अनेक रूपों में व्यक्त होती है। यही 'आत्मभाव' और 'समदर्शन' की भावना हमें 'सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया' के ऊंचाई के रास्ते पर ले जाती है।
समाज तक पहुंचेगी
संस्कृति की गूंज
उन्होंने ने बताया कि विश्व मानवता और बंधुत्व
की इस भावना को समाज के हर व्यक्ति के ह्रदय में उतारने के लिए विद्या भारती
संस्कृति शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र
(हरियाणा) कटिबद्ध है। कार्यक्रम का
शुभारंभ अतिथि परिचय के साथ हुआ, जिसे प्रधानाचार्य
डॉ. राजेश सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रथम सहायक रुक्मिणी
उपाध्याय ने आभार ज्ञापन किया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे।