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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। डेंगू के गंभीर
मरीजों में अब फेफड़ों में पानी भरने (पल्मोनरी एडिमा) जैसी जानलेवा जटिलताएं
सामने आ रही हैं। एम्स गोरखपुर के एक हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है, जिसमें बताया
गया है कि अक्सर इसे निमोनिया समझकर गलत इलाज किया जा रहा है। यह शोध 'इन्फेक्शियस
मेडिसिन जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।
एम्स गोरखपुर
द्वारा किए गए इस अध्ययन में 536 डेंगू मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने
आया कि लगभग 9 प्रतिशत गंभीर मरीजों में फेफड़ों में पानी भरने की समस्या
विकसित हुई। इनमें से अधिकांश मामलों में शुरुआती लक्षणों को निमोनिया मानकर उपचार
शुरू कर दिया गया था। एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरूप
मोहंती ने सोमवार को बताया कि आम धारणा है कि डेंगू केवल प्लेटलेट्स कम करता है,
लेकिन इसकी
वास्तविकता कहीं अधिक जटिल है। उन्होंने कहा कि हर 11वें संक्रमित मरीज में
पल्मोनरी एडिमा की स्थिति देखी जा रही है, जो बेहद गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है। डॉ.
मोहंती ने समझाया कि डेंगू के दौरान शरीर की रक्त कोशिकाओं से तरल पदार्थ बाहर
निकलकर फेफड़ों में जमा होने लगता है। इससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है।
इसी वजह से कई बार डॉक्टर इसे निमोनिया समझकर उसी प्रकार का इलाज शुरू कर देते हैं,
जिससे सही
उपचार में देरी होती है। शोध में यह भी
सामने आया है कि बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जा रही है, जो चिंता का
विषय है।
डॉ. अरूप मोहंती ने चेतावनी दी कि पल्मोनरी एडिमा वाले मरीजों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ देना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि डेंगू के मरीजों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के तरल पदार्थ नहीं देना चाहिए, ताकि समय रहते गंभीर जटिलता से बचा जा सके।