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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क।
गोरखपुर में गुरूवार को UGC के
नए नियमों के खिलाफ छात्र नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र नेताओं का कहना कहना
है कि सरकार ये कानून वापस नहीं लेती है तो विरोध और तेज करते हुए चक्का जाम करेंगे।
प्रदर्शन को तेज करते हुए छात्र नेता यूनिवर्सिटी गेट के सामने सड़क घेर कर बैठ गए।
जिससे यातायात बाधित होने लगी। जिसको देखते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें सड़क हटाने
की कोशिश की बीच प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच जबरदस्त झड़प देखी गई।
उन्होंने धक्का-
मुक्की करते हुए नेताओं को किनारे करने की कोशिश की लेकिन वे जिद पर अड़े रहे। विरोध
करते हुए छात्र नेता सड़क पर ही लेट गए और लगातार नारे बाजी करते रहे। डीडीयू
के गेट पर छात्र नेता अपने साथ चूड़ियां लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि ये चूड़ियां उन
सवर्ण जनप्रतिनिधियों के लिए है जो इस काले कानून के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते हैं।
ऐसे नेताओं को समाज का
जनप्रतिनिधि बनने का अधिकार नहीं है। जब वे जरूरत पड़ने पर समाज का साथ नहीं देंगे।
इसलिए हम उन्हें चूड़ियां सौंप रहे हैं। वे चूड़ियां पहने और अपने घर बैठे हम अपनी लड़ाई
खुद लड़ लेंगे जीतेंगे भी।
वहीं इन सवर्ण छात्र
नेताओं का सीधा कहना है कि जब तक सरकार इस काले कानून नहीं लेती या उसमें सुधार नहीं
करती तब तक ये विरोध जारी रहेगा आगे चक्का जाम भी हो सकता है। इसका हर्जाना उन्हें
2027 के चुनाव में भुगतना पड़ेगा। एक छात्र नेता ने कहा कि सरकार हम लोगों को बांटना
चाहती है। हम समाज में हर वर्ग के साथ रहते है कोई भेदभाव नहीं है ये लोग बस हमें बांटना
चाहते हैं। अगर यह कानून वापस नहीं होता है तो यूनिवर्सिटी गेट के सामने पेट्रोल डालकर
आत्मदाह करूंगा।
उनका कहना है कि ये सवर्ण
नेता आगे इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनके बच्चों की जिंदगियां दांव पर नहीं लगी
है। उनके बच्चे विदेश में जाकर पढाई करते है तो भारत जे नियम से क्या लेना देना।
पॉलिटिकल साइंस की स्टूडेंट
पल्लवी दुबे का कहना है कि यूजीसी की ओर से नया समानता नियम जमीनी स्तर पर कई छात्रों
के लिए आश्वासन के बजाय चिंता का कारण बन रहे हैं।
पल्लवी ने कहा कि सबसे
बड़ी चिंता बढ़ते शिक्षा खर्च को लेकर है। यदि स्वायत्तता के साथ सार्वजनिक वित्तपोषण
नहीं बढ़ा, तो फीस में वृद्धि और छात्रवृत्तियों में कटौती तय मानी जा सकती है।
इसका असर विशेष रूप
से ग्रामीण, वंचित और निम्न-आय वर्ग के छात्रों पर पड़ेगा। इसके अलावा डिजिटल विभाजन
और भाषा जैसी समस्याओं को भी इन नियमों में पर्याप्त स्थान नहीं मिला है। समानता तभी
संभव है जब नीति के साथ संवेदनशीलता, निरंतर निवेश और छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित
हो।