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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। रात आसमान में पूर्ण चंद्रमा का आकर्षक दृश्य देखने को
मिलेगा। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार ‘पिंक
मून’ नाम से प्रसिद्ध यह पूर्णिमा यानी बुधवार की शाम से गुरुवार की भोर तक साफ
तौर पर देखी जा सकेगी। खगोलविद ने बताया
कि ‘पिंक मून’ कोई अलग या खास रंग वाला चंद्रमा नहीं होता, बल्कि यह अप्रैल महीने की पूर्णिमा का पारंपरिक
नाम है। इस दौरान चंद्रमा सामान्य रूप से सफेद या हल्का पीला ही दिखाई देता है।
‘पिंक मून’ नाम उत्तरी अमेरिका में अप्रैल में खिलने वाले गुलाबी रंग के ‘फ्लॉक्स’
फूल से लिया गया है। यह नाम मौसम के बदलाव को दर्शाता है, न कि चंद्रमा के वास्तविक रंग को।
उन्होंने बताया कि भारत में इसे देखने का सबसे
अच्छा समय बुधवार की शाम सूर्यास्त के बाद से 2 अप्रैल की भोर तक
रहेगा। पूर्णिमा का चरम समय गुरुवार सुबह करीब 7:42 बजे होगा, लेकिन उस समय दिन होने के कारण चंद्रमा दिखाई
नहीं देगा। आम तौर पर बुधवार की रात और गुरुवार की सुबह तक चंद्रमा पूरा गोल और
ज्यादा चमकीला नजर आएगा।
खगोलविद ने बताया कि पिंक मून को देखने के लिए
किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है। खुले स्थान जैसे छत या मैदान से इसे आसानी से
देखा जा सकता है। शाम के समय यह पूर्व दिशा में और सुबह के समय पश्चिम दिशा में
दिखाई देगा। दूरबीन या टेलीस्कोप होने पर चंद्रमा की सतह के गड्ढे भी देखे जा सकते
हैं।
दो दिन तक मिलेगा
पूरा दृश्य
उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तब होती है जब
सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में होते हैं और
पृथ्वी से चंद्रमा का पूरा प्रकाशित हिस्सा दिखाई देता है। इस स्थिति को खगोलीय
भाषा में विशेष संरेखण कहा जाता है।
अमर पाल सिंह के अनुसार वैज्ञानिक रूप से
पूर्णिमा एक क्षण होती है, लेकिन सामान्य तौर
पर चंद्रमा एक दिन पहले और एक दिन बाद तक लगभग पूरा गोल दिखाई देता है। इसलिए 1 और 2 अप्रैल दोनों दिन
अच्छा दृश्य मिलेगा।