-
Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज़ नेटवर्क। गोरखपुर में मनरेगा से जुड़े ग्राम रोजगार सेवकों
ने विकास भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी सेवा-संबंधी समस्याओं को जिला
प्रशासन के समक्ष रखा। विरोध कार्यक्रम का उद्देश्य मानदेय भुगतान में देरी, EPF अंशदान,
अनुकम्पा नियुक्ति और ब्लॉक स्तर की प्रक्रियाओं में जटिलताओं को प्रशासन के ध्यान
में लाना था। विरोध के बाद संघ प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
विरोध कार्यक्रम में
संघ के जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रताप सिंह, जिला उपाध्यक्ष कैलाशपति विश्वकर्मा और
जिला संयुक्त मंत्री अनिल सिंह मौजूद रहे। तीनों पदाधिकारियों ने मांगों को जिला स्तर
पर गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर जोर दिया। संघ ने कहा कि लंबित समस्याओं पर बिना
निर्णय लिए समय बढ़ना फील्ड स्तर के कार्य को प्रभावित करता है।
आठ महीने से मानदेय भुगतान
लंबित
संघ ने ज्ञापन में बताया
कि जिले में लगभग 750 ग्राम रोजगार सेवक वर्ष 2006 से मनरेगा (2005) के तहत कार्यरत
हैं। संघ के अनुसार लगभग आठ महीने से मानदेय भुगतान लंबित है जबकि कार्य निरंतर जारी
रहा। संघ ने शासनादेश दिनांक 03 अक्टूबर 2021 के अनुसार 10,000 रुपये प्रति माह की
दर से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग की।
ज्ञापन में EPF अंशदान
की लंबित राशि कर्मचारियों के यूएन नंबर में जमा करने तथा सेवा अवधि में मृत कर्मचारियों
के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने की मांग शामिल रही। संघ का कहना है कि EPF और
अनुकम्पा नियुक्ति सेवा-सुरक्षा और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े विषय हैं, इसलिए इन
पर देरी नहीं होनी चाहिए।
ब्लॉक स्तर की प्रक्रियाओं
में जटिलता समाप्त करने की मांग
संघ ने ब्लॉक स्तर पर
पे-रोल प्रक्रिया की अनिवार्यता हटाने और ग्राम पंचायत/ब्लॉक स्तर पर उत्पन्न हो रही
प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने की मांग की। संघ ने कहा कि मनरेगा विधिक ढांचा वाली
योजना है इसलिए प्रक्रिया और भुगतान दोनों समयबद्ध हों।
रोजगार सेवकों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि विरोध का उद्देश्य समस्याओं को समाधान तक ले जाना है और फील्ड स्तर पर सबसे अधिक जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों के सेवा-संबंधी मुद्दों पर प्रशासन को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।