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Wednesday, 1st April, 2026
गोला
गोला बाजार के वार्ड
नंबर 18 में सरयू नदी
को प्रदूषित किए जाने का
गंभीर मामला सामने आया
है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है
कि नगर पंचायत के
शौचालय सफाई वाहन से
गंदगी सीधे सरयू नदी
में डाली जा रही
है। इस खुलेआम हो
रहे कार्य से नदी
की स्वच्छता और पवित्रता पर
गंभीर संकट खड़ा हो
गया है।
स्थानीय लोगों का कहना
है कि यह पूरा
मामला नगर पंचायत प्रशासन
और जनप्रतिनिधियों की जानकारी में
है, फिर भी कोई
कार्रवाई नहीं की जा
रही है। नागरिकों ने
अधिशासी अधिकारी सहित जिम्मेदार अधिकारियों
पर इस गंभीर विषय
पर आंखें मूंदे रहने
का आरोप लगाया है,
जिससे प्रशासन की भूमिका पर
सवाल उठ रहे हैं।
यह पहली बार नहीं
है जब सरयू नदी
में गंदगी फैलाने का
मुद्दा सामने आया है।
इससे पहले भी नदी
में कूड़ा गिराने और
उसमें आग लगाए जाने
को लेकर स्थानीय नागरिकों
ने विरोध दर्ज कराया
था। हालांकि, नगर पंचायत गोला
के आला अधिकारी हर
बार इस पर मौन
साधे रहे, और लगातार
चेतावनियों के बावजूद स्थिति
में कोई सुधार नहीं
हुआ।
यह गतिविधि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
(एनजीटी) के निर्देशों का
सीधा उल्लंघन है। एनजीटी के
स्पष्ट आदेश हैं कि
किसी भी नदी या
जलस्रोत में ठोस कचरा,
सीवेज या शौचालय की
गंदगी डालना कानूनन अपराध
है। नगर निकाय द्वारा
ऐसी गतिविधि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
नियम 2016 और जल प्रदूषण
निवारण अधिनियम 1974 का सीधा उल्लंघन
मानी जाती है। एनजीटी
के 'पोल्यूटर पे' सिद्धांत के
तहत प्रदूषण फैलाने वाले विभाग
या संस्था पर भारी
जुर्माना और जिम्मेदार अधिकारियों
की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाती
है।
हिंदू धर्म में पवित्र
मानी जाने वाली सरयू
नदी में लगातार हो
रहे प्रदूषण से क्षेत्रीय लोगों
में भारी आक्रोश है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन,
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर
पंचायत से तत्काल जांच
कर दोषियों के खिलाफ सख्त
कार्रवाई की मांग की
है। लोगों ने चेतावनी
दी है कि यदि
समय रहते कदम नहीं
उठाए गए तो वे
एनजीटी में शिकायत दर्ज
कराने को मजबूर होंगे।
इस संबंध में अधिशासी अधिकारी गोला, वैभव चौधरी ने बताया कि उन्हें अभी इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।