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Thursday, 4th June, 2026
खोराबार
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर के मदन
मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) के कंप्यूटर
साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 81 पुलिस
आरक्षियों के लिए साइबर फॉरेंसिक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया
गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय और गोरखपुर जोन
पुलिस के बीच हुए एमओयू के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा और अपर
पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन पुलिस मुथा अशोक जैन के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विमल कुमार ने अतिथियों और प्रशिक्षण प्राप्त करने आए
पुलिस कर्मियों के स्वागत के साथ की।
आधुनिक तकनीक पर दिया जोर
इस दौरान पुलिस आरक्षियों
को साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों और उपकरणों की जानकारी
दी गई। विशेषज्ञों ने मोबाइल फॉरेंसिक, वीडियो
फॉरेंसिक, डाटा रिकवरी, नेटवर्क
फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण जैसी तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही यह भी समझाया गया कि साइबर अपराधों की जांच में इन
तकनीकों का किस प्रकार उपयोग किया जाता है। कार्यक्रम के
मुख्य अतिथि एएसपी दिनेश गोदारा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से
बढ़ रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों का तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और दक्ष होना
बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि मोबाइल
फॉरेंसिक, वीडियो जांच, पासवर्ड
बायपासिंग के लिए Passware, कॉल डिटेल
रिकॉर्ड (CDR) विश्लेषण और डिक्रिप्शन
तकनीकों का इस्तेमाल जांच को मजबूत बनाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि इस
प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस की जांच क्षमता को और बेहतर बनाते हैं।
एडवांस टेक्नोलॉजी के बारे
में दी गई जानकारी
विशिष्ट अतिथि उपेन्द्र
सिंह, साइबर कमांडो, गोरखपुर जोन
पुलिस ने पुलिस कर्मियों को आधुनिक साइबर जांच उपकरणों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान फैराडे बैग्स, अल्ट्राकिट, राइट ब्लॉकर, गूगल गतिविधि, जीपीएस गतिविधि, फेसबुक कानून प्रवर्तन अभिलेख और साइबर सेफ पोर्टल और उत्तर प्रदेश पुलिस पोर्टल जैसे टूल्स का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है। इन उपकरणों के उपयोग से जांच प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और कानूनी रूप से मजबूत बनती है।