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• gorakhpur, cm yogi, AIIMS • गोरखपुर / खोराबार • 13-05-2026

नाखून के दुर्लभ ट्यूमर का अब बिना टांके इलाज, एम्स ने विकसित की नई तकनीक, मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध, मरीज को मिला आराम

रूरल न्यूज नेटवर्क। एम्स गोरखपुर ने नाखून के नीचे होने वाले दुर्लभ ग्लोमस ट्यूमर के इलाज में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। त्वचा रोग विभाग ने इस ट्यूमर का इलाज बिना टांके (स्यूचर-फ्री) की नई तकनीक से किया है। इस शोध को जर्नल ऑफ क्यूटेनियस और एस्थेटिक सर्जरी में प्रकाशित किया गया है। इस नई तकनीक में ट्यूमर निकालने के बाद नाखून (नेल प्लेट) को फिर से स्थापित करने के लिए पारंपरिक टांकों की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी जगह मेडिकल-ग्रेड सायनोएक्रिलेट एडहेसिव का उपयोग किया गया। मरीज का तीन माह तक लगातार फॉलोअप किया गया, जिसमें नाखून के बढ़ने की रफ्तार अच्छी पाई गई।

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एम्स के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि एक मरीज को नाखून के नीचे दुर्लभ और अत्यंत दर्दनाक ग्लोमस ट्यूमर की शिकायत थी। जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। पारंपरिक ट्रांस-अंगुअल सर्जरी में ट्यूमर हटाने के बाद नाखून को स्थिर रखने के लिए सूक्ष्म टांकों का प्रयोग किया जाता है, जो तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। इससे नाखून की संरचना में विकृति, असुविधा और पोस्ट-ऑपरेटिव दिक्कतें हो सकती हैं। एम्स ने अभिनव, सरल और न्यूनतम इनवेसिव तकनीक का उपयोग कर सर्जरी की। नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए, ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाने के बाद नाखून बेड की मरम्मत की गई। इसके बाद नाखून प्लेट को उसकी मूल शारीरिक स्थिति में सटीक रूप से फिर से स्थापित किया गया। नाखून के किनारों (प्रोक्सिमल और लेटरल नेल फोल्ड) पर सायनोएक्रिलेट एडहेसिव की एक पतली परत लगाई गई, जिससे तुरंत स्थिरता मिली। यह एडहेसिव एक साथ बायोलॉजिकल स्प्लिंट और प्रोटेक्टिव सील की तरह काम किया। इसका परिणाम यह रहा कि नाखून मजबूती से स्थिर रहा, संक्रमण का कोई खतरा नहीं हुआ और टांकों की आवश्यकता समाप्त हो गई। मरीज को दर्द से काफी आराम मिला और उसके नाखून पहले की तरह सामान्य रूप से वापस आ रहे हैं।

एम्स गोरखपुर के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि इस तकनीक से टांकों की आवश्यकता समाप्त हो गई। मरीज को स्यूचर रिमूवल की जरूरत नहीं पड़ी और दर्द भी अपेक्षाकृत कम रहा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मरीज के नाखून अब सामान्य रूप से वापस बढ़ रहे हैं।

उपलब्धि पर टीम को बधाई

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता ने इस उपलब्धि पर विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार गुप्ता और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि त्वचा रोग विभाग द्वारा विकसित यह टांका-रहित तकनीक नाखून शल्यक्रिया के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति है। यह तकनीक उपचार को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और किफायती बनाने के साथ मिनिमली इनवेसिव स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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