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gorakhpur, cm yogi, AIIMS 28-May-2026 02:52 PM

एम्स में डॉक्टरों के पदों में गड़बड़ी, सात विभागों में मनमाने ढंग से बदली गई श्रेणी और जाति, स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंची शिकायत

रूरल न्यूज नेटवर्क एम्स गोरखपुर में डॉक्टरों के पदों की श्रेणी और आरक्षण में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि सात विभागों में डॉक्टरों के पद और उनकी जातिगत श्रेणी को नियमों के विरुद्ध बदला गया है। नियमानुसार, डॉक्टरों के पदों की श्रेणी में बदलाव करने से पहले एकेडमिक कमेटी से संस्तुति लेना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही विज्ञापन जारी किया जा सकता है, और अंतिम नियुक्ति के लिए इंस्टीट्यूट बॉडी की मंजूरी आवश्यक होती है। आठ महीने के भीतर ही पदों की संख्या और आरक्षण श्रेणी में किए गए बदलावों ने सभी को चौंका दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय से शिकायत की गई है।

गोरखपुर एम्स प्रशासन ने 27 सितंबर 2025 को 88 फैकल्टी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। आवेदन की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई थी। इसमें 34 विभागों में प्रोफेसर के 21, एडिशनल प्रोफेसर के 15, एसोसिएट प्रोफेसर के 28 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 24 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे।

इसके करीब आठ महीने बाद, 9 मई 2026 को एम्स प्रशासन ने एक और विज्ञापन जारी किया। नए विज्ञापन में प्रोफेसर के 18, एडिशनल प्रोफेसर के 12, एसोसिएट प्रोफेसर के 28 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 25 पदों पर आवेदन मांगे गए हैं। इसी दौरान कई विभागों में पदों की संख्या और आरक्षण श्रेणी बदल दी गई,जिससे संस्थान के भीतर और बाहर सवाल खड़े हो गए हैं।

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इन विभागों में बदली गई पदों की श्रेणी

1- कार्डियोथोरेसिक सर्जरी

वर्ष 2025 में जारी विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर का एक पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। नए विज्ञापन में दो एसोसिएट प्रोफेसर पद अनारक्षित कर दिए गए,जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर का एक पद अनुसूचित जाति के लिए रखा गया।

2- न्यूरोलॉजी

वर्ष 2025 के विज्ञापन में एडिशनल प्रोफेसर का एक पद अनारक्षित और एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। अब पदों की संख्या बढ़ाकर तीन कर दी गई है। इसमें एसोसिएट प्रोफेसर के दो पदों में एक अनारक्षित और एक ओबीसी वर्ग के लिए रखा गया है,जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर का नया पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

3- आर्थोपेडिक्स

वर्ष 2025 में पहले एडिशनल प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के एक-एक पद अनारक्षित थे। एडिशनल प्रोफेसर के पद का मामला न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। इस बार केवल एसोसिएट प्रोफेसर का एक अनारक्षित पद विज्ञापित किया गया है।

4- पल्मोनरी मेडिसिन

पिछले विज्ञापन में एडिशनल प्रोफेसर का एक पद अनारक्षित और एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित था। अब असिस्टेंट प्रोफेसर का नया पद जोड़ते हुए उसे अनारक्षित श्रेणी में रखा गया है।

5- रेडियोलॉजी

पिछली बार छह पदों का विज्ञापन जारी हुआ था, जबकि इस बार सात पद निकाले गए हैं। प्रोफेसर का पद समाप्त कर दिया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पदों में दो ओबीसी, एक अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

6- सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी

पहले एसोसिएट प्रोफेसर के दो पदों में एक अनुसूचित जनजाति और दूसरा ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित था। इस बार असिस्टेंट प्रोफेसर का एक नया पद जोड़कर उसे ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

7- ट्रॉमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन

पिछले विज्ञापन में प्रोफेसर का एक अनारक्षित पद सृजित किया गया था, जिसे इस बार समाप्त कर दिया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर के तीन पद पूर्व की तरह अनारक्षित, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए रखे गए हैं। संस्थान के भीतर इसे विभागीय दबाव और बढ़ते गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।

पहले भी बदल चुकी है पदों की कैटेगरी

वर्ष 2023 में तत्कालीन कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर सुरेखा किशोर द्वारा एक विभाग में प्रोफेसर पद की कैटेगरी बदले जाने का मामला सामने आया था। जानकारी होने पर तत्कालीन अध्यक्ष ने इसे गलत बताते हुए नाराजगी जताई थी। बाद में पद की श्रेणी को पूर्ववत करना पड़ा था।

क्या बोले मीडिया प्रभारी?

एम्स गोरखपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने बताया कि विभिन्न विभागों में सीटों का पुनर्गठन पिछले साक्षात्कार के बाद नियुक्त हुए डॉक्टरों और संस्थान छोड़ने वाले चिकित्सकों की संख्या को देखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग में प्रोफेसर का पद संस्थान की आवश्यकता के अनुसार इस बार विज्ञापित नहीं किया गया है।

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