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Wednesday, 1st April, 2026
खोराबार
गोरखपुर एम्स के
डॉक्टरों ने एक
दिन के नवजात
की जटिल सर्जरी
कर उसे नया जीवन दिया
है। नवजात जन्म
से ही गंभीर
जन्मजात विकारों से
पीड़ित था। बच्चे
को न तो शौच करने
का छिद्र था
और न ही मूत्र की
सामान्य ओपनिंग। चिकित्सकीय
भाषा में इसे इंपरफोरेट एनस और स्क्रोटल हाइपोस्पेडियस कहा
जाता है। सफल पहले चरण
की सर्जरी के
बाद अब चार माह की
उम्र में दूसरे
चरण की सर्जरी
की जाएगी।
एम्स के डॉक्टरों
के अनुसार, शनिवार
देर रात 11 बजे
एक पिता अपने
एक दिन के नवजात बेटे
को एम्स की इमरजेंसी में लेकर
आया। बच्चे का
जन्म शहर के एक निजी
अस्पताल में हुआ था, जहां
डॉक्टरों ने पाया
था कि नवजात
को जन्म से ही शौच
का छिद्र (इंपरफोरेट
एनस) नहीं था।
इसके अलावा, बच्चे
का लिंग भी अंडकोष के
बीच में था, जो छोटा
और नीचे की ओर मुड़ा
हुआ था (स्क्रोटल
हाइपोस्पेडियस)। शौच
न कर पाने के कारण
नवजात का पेट लगातार फूल
रहा था और उसकी हालत
बिगड़ रही थी।
बच्चे को तत्काल
नियोनेटल आईसीयू (NICU) में भर्ती
किया गया। सर्जरी
विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव
गुप्ता ने तत्काल
सर्जरी का निर्णय
लिया। नियोनेटल आईसीयू
की इंचार्ज डॉ.
अंचला भारद्वाज ने
पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा
मित्तल से समन्वय
कर इलाज की प्रक्रिया शुरू कराई।
नवजात को भर्ती
किए जाने के
12 घंटे के भीतर पहला चरण
का ऑपरेशन किया
गया, जो पूरी तरह सफल
रहा। पहले चरण
में पेट में छिद्र कर
कोलोस्टॉमी बनाई गई
है।
1500 ग्राम
वजन, एनेस्थीसिया देना था चुनौतीपूर्ण
डॉ. गौरव गुप्ता
ने बताया कि
नवजात का वजन मात्र 1500 ग्राम था
और वह प्रीमैच्योर
भी था। इतनी
कम उम्र और वजन में
एनेस्थीसिया देना बेहद
चुनौतीपूर्ण होता है।
इसके बावजूद एनेस्थीसिया
विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष
कुमार शर्मा के
नेतृत्व में डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ.
भूपेंद्र कुमार, डॉ.
विजेता बाजपेयी और
डॉ. रवि शंकर
की टीम ने अत्यंत सावधानी
से एनेस्थीसिया देकर
सर्जरी संभव बनाई।
सर्जरी टीम में
डॉ. धर्मेंद्र पीपल,
डॉ. मुकुल सिंह,
डॉ. रजनीश कुमार,
डॉ. संदीप कुमार
और डॉ. ऐश्वर्या
का विशेष योगदान
रहा, जबकि पीडियाट्रिक
विभाग की टीम ने नवजात
की समग्र देखभाल
की।
एम्स में पहली बार
इतनी कम उम्र के
नवजात की सर्जरी
इस सफल सर्जरी
पर एम्स की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त
मेजर जनरल डॉ.
विभा दत्ता ने
पूरी मेडिकल टीम
को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि
एम्स गोरखपुर में
इस तरह की नवजात सर्जरी
पहली बार की गई है।
सर्जरी, एनेस्थीसिया और
पीडियाट्रिक विभाग के
संयुक्त प्रयास से
यह संभव हो सका, जो
संस्थान के लिए गर्व की
बात है।