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Wednesday, 1st April, 2026
पिपरौली
नन्हे सिंह, रिपोर्टर, रूरल न्यूज नेटवर्क, पिपरोली। प्राचीन दुर्गा मंदिर पिपरौली के प्रांगण में चल रहे श्रीराम कथा मे कथावाचक साध्वी गायत्री शास्त्री ने भगवान श्रीराम सहित चारों भाईयों के जन्म व बाललीला का वर्णन करते हुए कहा कि पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल, शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजमान थे। कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ जो कि नील वर्ण, चुंबकीय आकर्षण वाले, अत्यन्त तेजोमय, परम कान्तिवान तथा अत्यंत सुंदर था।
इस ब्लाक के
जन्म लेते ही अयोध्या खुशियों से भर गई। देवता,मनुष्य,जीव जंतु,पशु पक्षी सहित सभी आनंद मग्न हो गए। लोग
देवताओं का आभार व्यक्त करने के लिए घर-घर हवन करने लगे। हवन कुंडों के धुंए से
अयोध्या का आकाश मंडल बादल सदृश होकर पूरे अयोध्या को ढंक दिया।
कथा में अनिल उपाध्याय, नीलमणि उपाध्याय, हेमेंद्र पाल, मुरारी प्रसाद, राजाराम निगम, अरविंद गुप्ता, प्रेमपाल गुप्ता, आकाश गुप्ता, ज्वाला निगम, आदित्य निगम, संतोष निगम, घुरहू प्रसाद सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।