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Wednesday, 1st April, 2026
उरूवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। सिकरीगंज
में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंख निकालनी
पड़ी। जबकि 9 के आंखों की रोशनी चली गई। हालांकि एक मरीज की रोशनी बाद में वापस आ गई है।
1 फरवरी को न्यू राजेश हाईटेक
हॉस्पिटल में आई कैंप लगा था। 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन
हुआ था। 24 घंटे में ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। 18 की आंखों में इंफेक्शन
हो गया था। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली, लखनऊ
और वाराणसी के सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल
रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की कल्चर रिपोर्ट में इंफेक्शन की बात सामने आई है। जिन
डॉक्टरों ने इनका इलाज किया है, उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट जांच शुरू
हो गई है। न्यू राजेश हॉस्पिटल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है। मरीजों के
बयान दर्ज किए गए हैं।
मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट को भी बतौर सबूत जांच में शामिल किया गया है।
मजिस्ट्रेट ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर के भी बयान दर्ज किए हैं। मरीजों का कहना
है कि ऑपरेशन के दूसरे दिन आंख में दर्द और मवाद आने लगा था।
ऑपरेशन के 24 घंटे बाद इंफेक्शन
सिकरीगंज के न्यू राजेश हॉस्पिटल के नेत्र विभाग में 1 फरवरी
के दिन कुल 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन
हुआ था। 3 से 4 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। 2 फरवरी को अचानक सामने आया कि इन मरीजों की आंखों में इंफेक्शन हो रहा है। 1-1
करके 18 मरीज हॉस्पिटल दोबारा पहुंचे। इनका ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत हुआ था।
प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों के हाथ पाव फूल गए। मामला बिगड़ता हुआ देखकर इन
मरीजों को गोरखपुर के सृजन आई केयर में रेफर किया गया। यहां प्राथमिक जांच के बाद
सामने आया कि मरीजों की आंखों में सीवियर इंफेक्शन हुआ है।
यहां भी मरीजों का इलाज ठीक से नहीं हो सका। इसके बाद उनके परिजन उन्हें वाराणसी, लखनऊ और एम्स दिल्ली लेकर गए। 24 घंटे बाद सामने आया कि अलग-अलग जगह भर्ती 18 मरीजों में से 9 की आंखों की रोशनी चली गई। वहीं, 9 लोगों की आंख निकालनी पड़ी है, क्योंकि इंफेक्शन बढ़ता जा रहा था।