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gorakhpur, cm yogi, cold day, Sikriganj, New Rajesh Hospital 02-Mar-2026 02:15 PM

सिकरीगंज के न्यू राजेश हास्पिटल का लाइसेंस निरस्त, कार्रवाई से बचाने के लिए हास्पिटल संचालक से ठगे 15 लाख रूपए

रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर के सिकरीगंज में न्यू राजेश हाईटेक हास्पिटल में मोतियाबिंद का आपरेशन होने के बाद 9 मरीजों के आखों की रोशनी चली गई। उसके बाद मजिस्ट्रियल जांच हुई, हास्पिटल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट के बाद नोटिस दिया गया और अंतत: स्थायी रूप से लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। इस बीच हास्पिटल संचालक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लाइसेंस निरस्त होने से बचाने के नाम पर उनसे 15 लाख रुपये की ठगी हो गई।

यह पैसा लेकर उन्हें सीएमओ आफिस बुलाया गया था। हालांकि सीएमओ की ओर से कल ही इस मामले में उनके नाम का उपयोग कर पैसा वसूलने की कोशिश करने के आरोप में अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।

न्यू राजेश हाईटेक हास्पिटल के संचालक राजेश राय का कहना है कि सीएमओ आफिस में हनुमान मंदिर के पास उन्हें बुलाया गया था। कहा गया कि आपका काम करा दूंगा। झोले में रखकर वह 15 लाख रुपये कैश लेकर गए थे और वहां एक व्यक्ति ने उनसे पैसे ले लिए। उसने कहा कि बैठिए अभी मुलाकात हो जाएगी।

उसका इशारा सीएमओ से मुलाकात कराने का था। इस मामले में हास्पिटल संचालक का आरोप है कि उनसे ठगी हुई है तो इस बारे में सीएमओ आफिस के कुछ कर्मचारियों को जानकारी थी। उन्हें पता था कि किसका फोन मेरे पास आ रहा है।

क्या है मामला

सिकरीगंज में न्यू राजेश हाईटेक हास्पिटल संचालित होता है। यहां 1 फरवरी को एक मामला प्रकाश में आया। बताया गया कि मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद कुछ मरीजों की आंखें खराब हो गई हैं। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। प्रथम दृष्टया आपरेशन थियेटर में इंफेक्शन के कारण यह दिक्कत होनी बताई गई। 9 लोगों की आंखें इसमें खराब हो गईं।

हास्पिटल संचालक की ओर से अपने खर्चे पर सभी का दिल्ली एम्स एवं अन्य उच्च संस्थानों में भेजकर इलाज कराया गया। जब मामला प्रकाश में आया तो प्रशासन ने कार्रवाई कराते हुए हास्पिटल के आपॅरेशन थियेटर को सील कर दिया।

डीएम की ओर से एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। कमेटी ने जांच रिपोर्ट में आपरेशन थियेटर में एवं प्रयोग किए गए उपकरणों में वैक्टीरियल इंफेक्शन पाया।

इसके बाद सीएमओ की ओर से हास्पिटल संचालक को नोटिस देकर 3 दिनों में जवाब देने को कहा गया। संचालक की ओर से जवाब आया, उसके बाद लगभग 3 से 4 दिनों तक मंथन चला। 28 फरवरी को दोपहर बाद हास्पिटल का लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिया गया।

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संचालक से ठगी कैसे हुई

हास्पिटल के संचालक राजेश राय का आरोप है कि जब मामले में जांच होने लगी और रिपोर्ट आ गई तो उनसे कुछ लोगों ने संपर्क किया। कोई डिप्टी सीएम का ओएसडी बता रहा था, कोई खुद को गोल्डेन बाबा बता रहा था। सीएमओ बनकर भी बात की गई। पैसे की डिमांड हुई। कहा गया कि कोई कार्रवाई नहीं होगी।

राजेश राय ने कहा “मैं काफी परेशान था। टूट चुका था। एक दुर्घटना थी कि लोगों की आंखें खराब हो गईं। मैं पूरे नियम के साथ हास्पिटल चलाता था। परमानेंट डॉक्टर रखे थे। इस बीच जब लाइसेंस निरस्त होने की संभावना बनने लगी तो निराश हो गया। इस बीच कुछ लोगों ने फोन पर संपर्क कर लाइसेंस बचाने का दावा किया। मुझे सीएमओ आफिस बुलाकर 15 लाख रुपये कैश लिए गए।”

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संचालक ने सीएमओ आफिस की भूमिका पर सवाल

हास्पिटल संचालक ने कहा कि उनके पास डिप्टी सीएम का ओएसडी के नाम से, उनके जानने वाले के नाम से फोन आना शुरू हुआ। लेकिन इस पर विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन जब सीएमओ आफिस के एक बाबू ने इसके बारे में बताया तो मुझे विश्वास हो गया।

संचालक का कहना है कि उन्होंने इस बातचीत के बारे में किसी को नहीं बताया था लेकिन जब वह सीएमओ आफिस में बाबू से मिले तो उसने कहा “आप घबराइए मत। डिप्टी सीएम के यहां से फोन आया था। गोल्डेन बाबा भी बाए थे। यहां हड़कंप मचा हुआ है। आपकी सहायता करने को कहा गया है। लाइसेंस निरस्त नहीं होगा।”

संचालक ने बताया "सीएमओ आफिस के बाबू से ये बातें सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि मुझे फोन करने वाले शायद गंभीर हैं। मुझे सीएमओ से मिलवाने का आफर देकर बुलाया गया। मैं फिर झोले में मिठाई और पैसा लेकर उसी बाबू के पास गया। सीएमओ से मिलवाने को कहा।

मेरी मिलने की पर्ची चपरासी को दी गई लेकिन वह अंदर नहीं ले गया। मीटिंग में होने की बात बताई गई। इसी के बाद मुझे फिर फोन आया और कहा गया कि सीएमओ आफिस में हनुमान मंदिर के पास पहुंचिए। एकाउंट विभाग का एक आदमी आएगा, उसे पैसे दे दीजिएगा।"

हास्पिटल संचालक ने आरोप लगाया "मैंने हनुमान मंदिर के पास पहुंचकर पैसे उसे दे दिए। उसने कहा कि बैठिए अभी आपसे साहब मिलेंगे। मैंने यह भी नहीं देखा कि वह किस ओर गया। मैं मिलने के लिए गया लेकिन मुलाकात नहीं हुई।

कुछ समय बाद सीएमओ आफिस के बाबू का फोन आया कि आपका लाइसेंस निरस्त हो गया।" संचालक ने कह कि इस मामले में सीएमओ आफिस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

इस मामले में लडूंगा कानूनी लड़ाई

हास्पिटल संचालक ने आरोप लगाया कि उनके ही क्षेत्र में संचालित एक हास्पिटल संचालक स्वास्थ्य विभाग के लोगों से मिलकर मेरे हास्पिटल के खिलाफ षडयंत्र करता है। इसके पहले भी कई कार्रवाई जानबूझकर की गई।

इस मामले में मैं कानूनी लड़ाई लडूंगा। या तो मेरा लाइसेंस बहाल हो या पैसा वापस किया जाए। जल्द ही एफआईआर करूंगा। स्वास्थ्य विभाग को इससे अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आखिर क्या कारण था कि जब यह घटन 1 फरवरी की है तो लाइसेंस निरस्त करने में पूरा महीना लग गया।

जानिए क्या कहते हैं सीएमओ

मुझे यह जानकारी मिली थी कि कोई मेरे नाम से फोन कर पैसे की डिमांड कर रहा है। मैंने उस मोबाइल नंबर सहित पुलिस में शिकायत की है। संभवत: यह डिजिटल फ्रॉड का मामला है। पुलिस की जांच में पूरा मामला साफ हो जाएगा।

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